हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा ठेके में शामिल होने वाले निविदाकारों का पूरा ब्यौरा
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के सभी जिला और सिविल अस्पतालों में पैथोलॉजी सर्विस के लिए जारी ठेके पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। यह ठेका नेशनल हेल्थ मिशन द्वारा जारी किया गया था। जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने कहा कि टेण्डर प्रक्रिया के तहत पहले टेक्निकल और उसके बाद फाइनेन्शियल बिड खोली जानी है, जिसमें समय लगेगा। ऐसे में इस स्तर पर टेण्डर पर रोक लगाना उचित नहीं होगा। हालांकि कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि शुक्रवार को होने वाली टेक्निकल बिड में शामिल होने वाले सभी ठेकेदारों का विस्तृत ब्यौरा अगली सुनवाई पर पेश किया जाए। यह निर्देश आनंद पटेल (नर्मदापुरम) द्वारा दायर जनहित याचिका और नई दिल्ली स्थित स्रोटस हेल्थकेयर प्रा.लि. की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए गए।
याचिकाकर्ताओं का आरोप
याचिकाओं में कहा गया कि 2 जनवरी को जारी टेण्डर की शर्तों को अंतिम समय में बदला गया, ताकि छोटे निविदाकारों को बाहर कर केवल बड़े प्लेयरों को लाभ पहुंचाया जा सके। आरोप है कि एक नई शर्त जोड़ दी गई, जिसके अनुसार वही निविदाकार पात्र होंगे जिन्होंने एक वर्ष में कम से कम 75 लाख पैथोलॉजी टेस्ट किए हों। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस शर्त से छोटे निविदाकार स्वतः ही बाहर हो जाएंगे।
विश्वस्तरीय पैथोलॉजी सेवाएं उपलब्ध कराना लक्ष्य: सरकार
प्रारंभिक सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने दलील दी कि सरकार का उद्देश्य सरकारी अस्पतालों में विश्वस्तरीय पैथोलॉजी सेवाएं उपलब्ध कराना है, इसी कारण उच्च मानकों वाली शर्तें रखी गई हैं। इसे गलत नहीं ठहराया जा सकता।
सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने टेण्डर पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार करते हुए सरकार को निर्देश दिया कि वह ठेके में भाग लेने वाले सभी निविदाकारों का विवरण अगली सुनवाई में रिकॉर्ड पर प्रस्तुत करे।
